
ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय (यूबीसी) की स्कूल ऑफ क्रिएटिव राइटिंग में मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स कर रही आरओशनी रियार एक छह-भागी कविता पांडुलिपि विकसित कर रही हैं, जिसमें विरासत में मिले पंजाबी इतिहास, पीढ़ीगत आघात और सांस्कृतिक ज्ञान को शरीर के अनुभव के जरिए समझा जाएगा। यह काम उन्हें कनाडा ग्रेजुएट रिसर्च स्कॉलरशिप्स मास्टर’स (सीजीआरएस एम) प्रोग्राम के तहत समर्थन के साथ आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
मुख्य तथ्य
- रियार यूबीसी के कला संकाय में क्रिएटिव राइटिंग के मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स कार्यक्रम में नामांकित हैं।
- उनका शोध विषय है: “काव्यात्मक कल्पनाओं के माध्यम से विरासत में मिले पंजाबी इतिहासों की खोज।”
- उनका प्रोजेक्ट छह-भागी कविता पांडुलिपि के रूप में तैयार हो रहा है।
- उन्हें कनाडा ग्रेजुएट रिसर्च स्कॉलरशिप्स मास्टर’स (सीजीआरएस एम) प्रोग्राम से सहायता मिली है।
- उनकी शोध पर्यवेक्षक ब्रोनवेन टेट हैं।
यूबीसी के स्नातक छात्रों के लिए इसका क्या मतलब है?
रियार का उदाहरण दिखाता है कि यूबीसी में स्नातकोत्तर अध्ययन में रचनात्मक अभ्यास, शोध और वित्तीय सहायता एक साथ कैसे जुड़ सकते हैं। कला-आधारित कार्यक्रमों के छात्रों के लिए यह खास तौर पर उपयोगी है, क्योंकि उनका एमएफए प्रोजेक्ट पारंपरिक थीसिस मॉडल तक सीमित नहीं है; इसे पाठ्यक्रम, कार्यशाला-प्रतिक्रिया और एक वित्तपोषित शोध अवधि के साथ आकार दिया जा रहा है।
यह उन आवेदकों के लिए भी व्यावहारिक संकेत देता है जो अपने लंबे-समय के प्रोजेक्ट को किसी कार्यक्रम से जोड़ना चाहते हैं। रियार के मामले में, एमएफए उन्हें अपनी दूसरी पुस्तक को थीसिस के रूप में विकसित करने की संरचना देता है, जबकि छात्रवृत्ति सहायता इस डिग्री को अधिक संभव बनाती है। जिन उम्मीदवारों को लेखन, पर्यवेक्षण और निरंतर रचनात्मक उत्पादन को जोड़ने वाला स्नातक कार्यक्रम चाहिए, उनके लिए यह रास्ता विशेष रूप से प्रासंगिक हो सकता है।
रियार यूबीसी के क्रिएटिव राइटिंग माहौल में सहपाठियों और स्थापित लेखकों की कार्यशाला-आलोचना को भी महत्वपूर्ण बताती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कार्यक्रम केवल स्वतंत्र शोध पर नहीं, बल्कि नियमित संपादकीय और शैक्षणिक प्रतिक्रिया पर भी आधारित है।
आरओशनी रियार किस पर शोध कर रही हैं?
रियार का शोध इस सवाल पर केंद्रित है कि विरासत में मिले इतिहास कविता के माध्यम से शरीर में कैसे मौजूद रहते हैं। वह अपनी पांडुलिपि में पंजाब से जुड़े प्रश्नों, जैसे विभाजन, सिख जनसंहार और ब्रिटिश उपनिवेशवाद, को अपने जीवन और पारिवारिक वंश से जोड़ने की योजना बना रही हैं।
यह परियोजना छह हिस्सों में होगी, जिनमें हर हिस्सा एक इंद्रिय से जुड़ा रहेगा। अंतिम भाग को वह “वंश की इंद्रिय” के रूप में देखती हैं। इस संरचना का उद्देश्य व्यक्तिगत स्मृति, शारीरिक अनुभूति और ऐतिहासिक शोध को एक ही रचना में पिरोना है।
उनकी छात्रवृत्ति स्नातकोत्तर अध्ययन में कैसे मदद करती है?
प्रोफ़ाइल के अनुसार, रियार को सीजीआरएस एम प्रोग्राम के साथ यूबीसी और एसएसएचआरसी फंड की वित्तीय सहायता भी मिल रही है। यही सहयोग उन्हें अपनी एमएफए पढ़ाई के साथ थीसिस पांडुलिपि पर काम जारी रखने में मदद करता दिखता है।
वह यह भी कहती हैं कि उन्होंने यूबीसी इसलिए चुना क्योंकि उन्होंने वहीं अपना बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स किया था और परिसर, लोगों तथा कार्यक्रम संरचना से जुड़ाव महसूस करती थीं। वैंकूवर में बने रहना भी स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए विश्वविद्यालय चुनने का एक कारण था।
उन्होंने यह रास्ता क्यों चुना?
रियार कहती हैं कि वह अपनी “जिज्ञासा को खुद को उसमें डुबोने की अनुमति” देना चाहती थीं, और सही कार्यक्रम ढूँढना उनके लिए अपने लक्ष्यों को दिशा और जवाबदेही देने के लिए जरूरी था। उनके अनुसार एमएफए उन्हें एक ऐसी संरचना देता है जो उन्हें खास तौर पर प्रेरक लगती है, क्योंकि इसमें दूसरी पुस्तक के लिए जरूरी लेखन और संशोधन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्नातक अध्ययन से पहले वह एक फ्रीलांस लेखक के रूप में और कला-आधारित गैर-लाभकारी क्षेत्र में उत्पादन तथा संचार के काम में रही हैं। उनका कहना है कि इस पृष्ठभूमि ने उन्हें स्नातकोत्तर अध्ययन की तेज़ रफ्तार और समयसीमाओं के लिए तैयार किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरओशनी रियार का शोध विषय क्या है?
उनका शोध विषय है “काव्यात्मक कल्पनाओं के माध्यम से विरासत में मिले पंजाबी इतिहासों की खोज।” यह छह-भागी कविता पांडुलिपि पर केंद्रित है, जो देखती है कि इतिहास, आघात और सांस्कृतिक ज्ञान शरीर में कैसे मौजूद रह सकते हैं।
आरओशनी रियार को कौन-सा पुरस्कार मिल रहा है?
उन्हें कनाडा ग्रेजुएट रिसर्च स्कॉलरशिप्स मास्टर’स (सीजीआरएस एम) प्रोग्राम की प्राप्तकर्ता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

