
अमेरिकी शिक्षा विभाग ने 2025 कॉलेज अफ़ोर्डेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट जारी की है। यह संघीय रिपोर्ट कॉलेज कीमतों का डेटा, लागत बढ़ने पर संस्थानों की व्याख्याएँ और पहली बार डाउनलोड करने योग्य संस्थागत प्रतिक्रियाएँ एक जगह लाती है। छात्रों, परिवारों और करदाताओं के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि यह ट्यूशन, नेट प्राइस और स्कूल-दर-स्कूल लागत प्रवृत्तियों को एक साथ दिखाती है।
मुख्य तथ्य
- रिपोर्ट 14 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी शिक्षा विभाग के उच्चतर शिक्षा कार्यालय ने जारी की।
- लगभग 450 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को 2025 कॉलेज अफ़ोर्डेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी एक्सप्लनेशन फ़ॉर्म पूरा करना था।
- विभाग ने कहा कि 198 संस्थान ट्यूशन और फ़ीस में सबसे अधिक बढ़ोतरी वाली सूची में और 216 संस्थान नेट कॉस्ट में सबसे अधिक बढ़ोतरी वाली सूची में शामिल थे।
- विभाग के मुताबिक संस्थागत प्रतिक्रियाएँ पहली बार डाउनलोड करने योग्य फ़ॉर्मेट में उपलब्ध हैं।
छात्रों और परिवारों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह रिपोर्ट संभावित छात्रों को सरकारी डेटा के आधार पर महंगे और कम लागत वाले संस्थानों की तुलना करने का तरीका देती है। विभाग कहता है कि इससे प्रकाशित ट्यूशन और वास्तव में चुकाई जाने वाली कीमत के बीच का अंतर भी दिख सकता है, जो पहली पीढ़ी के और कम आय वाले आवेदकों के लिए खास तौर पर उपयोगी है।
छात्र कॉलेज चुनते समय कॉलेज अफ़ोर्डेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी सेंटर तथा एफएएफएसए लोअर अर्निंग्स इंडिकेटर जैसे उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं। विभाग यह भी कहता है कि उसकी वार्षिक सूचियाँ उच्च और निम्न लागत वाले दोनों तरह के स्कूलों को शामिल करती हैं, ताकि तुलना करते समय केवल ऊँची ट्यूशन को गुणवत्ता का पैमाना न माना जाए।
- आवेदन करने से पहले बताई गई ट्यूशन और नेट प्राइस की जाँच करें।
- चार-वर्षीय, दो-वर्षीय और दो-वर्ष से कम अवधि वाले संस्थानों सहित अलग-अलग सेक्टरों की तुलना करें।
- मूल्य बढ़ोतरी पर संस्थानों की व्याख्याएँ देखें, जो अब डाउनलोड की जा सकती हैं।
रिपोर्ट में किन कॉलेजों को उजागर किया गया?
विभाग ने कई महंगे संस्थानों को उजागर किया, जिनमें यूनिवर्सिटी ऑफ़ सदर्न कैलिफ़ोर्निया, कोलंबिया यूनिवर्सिटी इन द सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क, केन्यन कॉलेज, ब्राउन यूनिवर्सिटी, पेपरडाइन यूनिवर्सिटी, कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ द आर्ट्स और लोयोला मैरीमाउंट शामिल हैं। उसने कुछ कम लागत वाले संस्थानों पर भी ध्यान दिलाया, जैसे ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी, वेस्टर्न गवर्नर्स यूनिवर्सिटी, द यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ोर्ट लॉडरडेल, वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी ऐट पार्कर्सबर्ग, कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी – लॉस एंजिलिस और टेक्सस कॉलेज।
विभाग के अनुसार ये उदाहरण दिखाते हैं कि छात्रों को प्रकाशित ट्यूशन और नेट प्राइस दोनों देखनी चाहिए, क्योंकि एक संस्थान से दूसरे संस्थान तक और स्टिकर प्राइस से वास्तविक लागत तक अंतर काफी हो सकता है।
डेटा को अधिक सुलभ क्यों बनाया जा रहा है?
विभाग का कहना है कि वह कॉलेज मूल्य निर्धारण के आसपास पारदर्शिता बढ़ाने के लिए संस्थागत प्रतिक्रियाओं को अधिक सुलभ बना रहा है और हर साल आधारभूत डेटा प्रकाशित कर रहा है। उसके अनुसार इससे बढ़ती लागत पर सार्वजनिक निगरानी मजबूत होती है और छात्रों व परिवारों को यह समझने में मदद मिलती है कि समय के साथ कीमतें क्यों बढ़ी हैं।
कितने संस्थानों को जवाब देना था?
लगभग 450 संस्थानों को 2025 का एक्सप्लनेशन फ़ॉर्म जमा करना था, और विभाग ने उनकी प्रतिक्रियाओं का सारांश रिपोर्ट में दिया। विभाग ने कहा कि कई संस्थानों ने लागत बढ़ने के पीछे अतिरिक्त स्टाफ, अधिक वेतन और मज़दूरी, तथा बढ़ती परिचालन लागत को कारण बताया।
क्या आगे कीमतें घटाने की योजना है?
विभाग के अनुसार 60% संस्थानों ने कहा कि उनकी कीमतें कम करने की कोई योजना नहीं है, जबकि 40% ने कहा कि वे ऐसा करना चाहते हैं। विभाग ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में उसने कई संस्थानों को ट्यूशन, फ़ीस और अन्य लागतें फ्रीज़ या कम करते देखा है।

