मैप ऑफ लाइफ रिपोर्ट: वैश्विक जैव विविधता की सुरक्षा के लिए और प्रगति की ज़रूरत

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वैश्विक आवासों और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा के प्रयासों को और तेज़ करने की ज़रूरत है, यह निष्कर्ष मैप ऑफ लाइफ की नई रिपोर्ट में सामने आया है। येल सेंटर फ़ॉर बायोडायवर्सिटी एंड ग्लोबल चेंज की प्रमुख पहल की यह 2026 आकलन रिपोर्ट कहती है कि संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क पिछले वर्ष बढ़े, लेकिन प्रगति असमान रही और कई प्रजातियाँ अभी भी संरक्षण प्रणालियों में कमजोर रूप से शामिल हैं।

मुख्य तथ्य

  • मैप ऑफ लाइफ की 2026 रिपोर्ट कहती है कि संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क पिछले वर्ष बढ़े, लेकिन लाभ सीमित रहे।
  • रिपोर्ट के अनुसार, पाँच में से एक स्थलीय कशेरुकी प्रजाति ऐसे आवासों में रहती है जो वैश्विक संरक्षित क्षेत्रों में बहुत कम प्रतिनिधित्व पाते हैं।
  • जो प्रजातियाँ संभवतः संकटग्रस्त मानी जाती हैं, उनमें यह अनुपात तीन में एक तक पहुँच जाता है।
  • समुद्री मछली और स्तनधारी प्रजातियों में 12 में से एक प्रजाति मौजूदा समुद्री संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क से लगभग पूरी तरह असुरक्षित है।
  • यह रिपोर्ट यूएन कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी की कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ द पार्टीज़ की 17वीं बैठक के साथ यरेवन, आर्मेनिया, में 19 से 30 अक्टूबर के बीच जारी हो रही है।

संरक्षण नीति के लिए इसका व्यावहारिक मतलब क्या है?

इस रिपोर्ट का सीधा संदेश यह है कि केवल भूमि और समुद्र में संरक्षित क्षेत्र बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है। शोधकर्ताओं के अनुसार नई सुरक्षा को रणनीतिक ढंग से उन इलाकों में रखा जाना चाहिए जहाँ नाज़ुक आवास हैं, ताकि उन प्रजातियों तक संरक्षण पहुँचे जिन्हें अभी भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही—खासकर वे जो पहले से संकटग्रस्त हैं।

रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया Species Protection Index, कुणमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के लक्ष्य 3 के लिए आधिकारिक संकेतक है, जिसका उद्देश्य 2030 तक भूमि और समुद्र के 30 प्रतिशत हिस्से की सुरक्षा करना है। इसलिए यह रिपोर्ट सरकारों और संरक्षण योजनाकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें यह तय करना है कि अगली सुरक्षा कहाँ होनी चाहिए।

  • भूमि संरक्षण में बढ़त सीमित बताई गई, जबकि महासागरीय प्रगति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
  • ओमान, फ़्रेंच पोलिनेशिया और उज्बेकिस्तान में भूमि क्षेत्रों पर सुधार दर्ज किए गए।
  • फ़्रेंच पोलिनेशिया, श्रीलंका और डेनमार्क में समुद्री संरक्षण में सुधार पहचाना गया।

कई प्रजातियाँ अब भी जोखिम में क्यों हैं?

रिपोर्ट के अनुसार मुख्य समस्या केवल यह नहीं है कि कितनी भूमि और समुद्र संरक्षित है, बल्कि यह भी है कि क्या वे क्षेत्र उन आवासों से मेल खाते हैं जिनकी प्रजातियों को सबसे अधिक ज़रूरत है। येल के वाल्टर जेट्ज़ ने कहा कि आकलित प्रजातियों में लगभग आधी अभी भी बेहद अपर्याप्त रूप से संरक्षित हैं, और जो प्रजातियाँ पहले से संकटग्रस्त हैं, उनके लिए संरक्षण अंतर विशेष रूप से बड़े हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि Species Protection Index यह परखता है कि क्या संरक्षित क्षेत्र, जैसा कि World Database on Protected and Conserved Areas में दर्ज है, जैव विविधता के लिए सकारात्मक नतीजे दे रहे हैं। येल के एलेक्स किलियन ने कहा कि नए संरक्षित क्षेत्र तभी जैव विविधता संरक्षण में सहायक होंगे जब उन्हें नाज़ुक आवासों की रक्षा के लिए रणनीतिक रूप से चुना जाए।

2026 रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने क्या आंका?

रिपोर्ट में लगभग 34,000 स्थलीय कशेरुकी प्रजातियों, 45,000 पेड़ प्रजातियों और 13,000 समुद्री मछली व स्तनधारी प्रजातियों की आवास सुरक्षा स्थिति का मूल्यांकन किया गया। इसमें कहा गया है कि संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क ने स्थलीय कशेरुकी और पेड़ों के लिए कुछ चुनिंदा सफलताएँ हासिल कीं, लेकिन भूमि-आधारित संरक्षण में समग्र रूप से उल्लेखनीय प्रगति अभी भी नहीं दिखती।

येल सेंटर, जिसकी स्थापना 2012 में हुई थी, वैश्विक प्रजाति आबादियों की निगरानी करता है और संरक्षण संबंधी मार्गदर्शन देता है। 16 साल पहले शुरू हुई मैप ऑफ लाइफ, Species Protection Index के ज़रिए वैश्विक जैव विविधता की स्थिति और संरक्षण प्रवृत्तियों पर रिपोर्ट करती है।

यह वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों से कैसे जुड़ता है?

यह रिपोर्ट आर्मेनिया के यरेवन में यूएन कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी की कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ द पार्टीज़ की 17वीं बैठक के समय जारी हो रही है, जहाँ सरकारें संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता लक्ष्यों पर चर्चा कर रही हैं। Species Protection Index को कुणमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के तहत “30 बाय 30” लक्ष्य का औपचारिक संकेतक माना जाता है।

जेट्ज़ ने कहा कि इस रिपोर्ट में दिए गए वैज्ञानिक-संचालित उपकरण 2030 की समयसीमा के करीब पहुँचते हुए नतीजों को दिशा देने में मदद कर सकते हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष यह जाँचने की एक कसौटी के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं कि संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार वास्तव में प्रजातियों और आवासों के लिए ठोस संरक्षण लाभ दे रहा है या नहीं।

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