
नीदरलैंड्स में सरकार-आदेशित एक अध्ययन कहता है कि अंतरराष्ट्रीय छात्र समय के साथ देश के लिए शुद्ध आर्थिक लाभ हैं, क्योंकि अध्ययन के बाद ठहरकर काम करने वाले स्नातकों से मिलने वाला कर और व्यापक आर्थिक गतिविधि उनकी पढ़ाई के दौरान होने वाली सार्वजनिक लागत से अधिक है। यह निष्कर्ष ऐसे समय आया है जब 13 डच विश्वविद्यालयों ने सरकार के साथ नए विदेशी नामांकन को सालाना 17,000 से कम रखने और अंग्रेज़ी-शिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार को धीमा करने पर सहमति दी है।
मुख्य तथ्य
- CPB, नीदरलैंड्स की सरकारी आर्थिक नीति विश्लेषण संस्था, ने पाया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र अपनी मेजबानी की सार्वजनिक लागत से अधिक योगदान देते हैं।
- लगभग 25% अंतरराष्ट्रीय स्नातक नीदरलैंड्स में रुकते हैं, जो 10 साल पहले की तुलना में अधिक है।
- गैर-EEA छात्रों में लगभग 40% स्नातक होने के बाद कुछ समय के लिए रुकते हैं, जबकि EEA छात्रों में यह आंकड़ा लगभग 20% है।
- 13 डच विश्वविद्यालयों ने 15 जुलाई 2026 को नए विदेशी नामांकन 17,000 प्रतिवर्ष से नीचे रखने का समझौता किया।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विश्वविद्यालयों के लिए इसका क्या मतलब है?
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए यह अध्ययन संकेत देता है कि उनकी उपस्थिति डच उच्च शिक्षा और व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए मूल्य पैदा करती है, खासकर उन लोगों के लिए जो स्नातक होने के बाद काम करते रहते हैं। विश्वविद्यालयों के लिए यह अंतरराष्ट्रीयकरण के आर्थिक पक्ष को मजबूत करता है, लेकिन साथ ही प्रवेश-वृद्धि पर दबाव भी बढ़ाता है।
व्यावहारिक तस्वीर इतनी सीधी नहीं है, क्योंकि आवास की कमी अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है। यही कारण है कि कुछ विश्वविद्यालय आने वाले छात्रों को तब तक यात्रा न करने की सलाह दे रहे हैं जब तक उनके पास सत्यापित आवास न हो। 700 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के एक अलग सर्वे में लगभग एक-तिहाई ने आवास मिलने से पहले तीन महीने से अधिक समय तक खोज की।
विश्वविद्यालयों के समझौते का असर कार्यक्रम-योजना पर भी पड़ेगा: वे निकट अवधि में नए अंग्रेज़ी-भाषा कार्यक्रम तब तक नहीं बनाएंगे जब तक वे STEM, स्वास्थ्य सेवा या प्रौद्योगिकी में श्रम-घाटा से जुड़े न हों, या यूरोपीय विश्वविद्यालय ढांचे के तहत न आते हों।
EEA और गैर-EEA छात्रों में क्या फर्क बताया गया?
रिपोर्ट के अनुसार, गैर-EEA छात्रों को पढ़ाई के दौरान मेजबानी के लिहाज से अधिक महंगा माना जाता है, क्योंकि EEA छात्र डच शुल्क दरों पर पढ़ते हैं और कुछ शर्तों के तहत छात्र वित्तपोषण तक पहुंच सकते हैं, जबकि गैर-EEA छात्रों को पूरी फीस देनी होती है और उन्हें वह वित्तपोषण नहीं मिलता। फिर भी CPB का निष्कर्ष है कि जो गैर-EEA छात्र काम करने के लिए रुकते हैं, वे नीदरलैंड्स की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनकाल में 2.43 लाख यूरो का मूल्य जोड़ते हैं, जबकि यूरोपीय छात्रों के लिए यह आंकड़ा 82,500 यूरो है।
यह अंतर आंशिक रूप से गैर-EEA स्नातकों की अधिक ठहराव दर से जुड़ा बताया गया है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 40% गैर-EEA छात्र कुछ समय के लिए रुकते हैं, जबकि EEA छात्रों में यह अनुपात लगभग 20% है।
आवास की कमी बहस को क्यों प्रभावित कर रही है?
नीदरलैंड्स में अंतरराष्ट्रीय भर्ती पर आवास एक केंद्रीय बाधा बना हुआ है, क्योंकि कमी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय—दोनों तरह के छात्रों को प्रभावित करती है। साक्ष्य बताता है कि कुछ डच छात्र घर से लंबी यात्रा के कारण अपनी पसंदीदा यूनिवर्सिटी छोड़ देते हैं, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय छात्र उपयुक्त आवास नहीं जुटा पाते।
Stichting WOON की हाउसिंग सलाहकार Hanna Smit का तर्क है कि अधिक छात्र-आवास कैंपस पर बनाया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी परियोजनाओं के लिए अलग जोनिंग होती है और वे सामान्य आवासीय विकास से सीधे प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं। CPB ने भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों का आवासीय प्रभाव समय के साथ सीमित रहता है और यह छात्र संख्या से अधिक आवास नीति पर निर्भर करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कितने अंतरराष्ट्रीय स्नातक नीदरलैंड्स में रुकते हैं?
लगभग 25% अंतरराष्ट्रीय स्नातक नीदरलैंड्स में कुछ समय के लिए रुकते हैं, जबकि गैर-EEA छात्रों में यह अनुपात लगभग 40% और EEA छात्रों में लगभग 20% है।
डच विश्वविद्यालयों ने क्या करने पर सहमति दी?
13 विश्वविद्यालयों ने 15 जुलाई 2026 को सरकार के साथ नए विदेशी नामांकन 17,000 प्रतिवर्ष से नीचे रखने और नए अंग्रेज़ी-भाषा कार्यक्रम बनाने से बचने पर सहमति दी, जब तक कि वे श्रम-घाटे या यूरोपीय विश्वविद्यालय ढांचे से न जुड़े हों।

